महिला सिपाही बोली- मैं जान देने जा रही हूं, और कर ली सुसाइड, होमगार्ड गिरफ्तार

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लखनऊ। मोहनलालगंज के मऊ मोहल्ले में किराए के मकान में रहने वाली उर्मिला (24) 112 की पीआरवी में तैनात थी। रविवार रात को उसने खुदकुशी कर ली। पुलिस ने निगोहां थाने पर तैनात होमगार्ड जितेंद्र कुमार शर्मा पर खुदकुशी के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोपी की बाइक भी पुलिस को आरक्षी के घर के बाहर खड़ी मिली। पुलिस जब पहुंची तो आरक्षी उर्मिला का मोबाइल गायब था। पुलिस ने उसकी तलाश की। काफी देर बाद वह घर से कुछ दूर पर झाड़ियों में मिला। पुलिस ने मोबाइल को कब्जे में ले लिया है।
पुलिस के मुताबिक, उर्मिला मूलरूप से अयोध्या के तारून नागपाली की रहने वाली थी। उसके भाई दिलीप वर्मा के बयान के आधार पर होमगार्ड के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जितेंद्र निगोहां थाने में तैनात था। दिलीप का आरोप है कि जितेंद्र की मुलाकात करीब एक साल पहले उर्मिला से मोहनलालगंज थाने में तैनाती के दौरान हुई थी। तब से वह बहन को परेशान कर रहा था। वह बहन से एकतरफा प्यार करता था। जितेंद्र की हरकतों से परेशान होकर उसकी बहन ने खुदकुशी की है।

गरीब परिवार की उर्मिला थी परिवार का सहारा
गरीब परिवार की उर्मिला वर्मा 2018 में पुलिस विभाग में आरक्षी पद पर भर्ती हुई थी। वह नौकरी कर अपने माता-पिता सहित पूरे परिवार का भरण पोषण करती थी। रविवार रात दस बजे से आरक्षी उर्मिला की पीआरवी में ड्यूटी थी लेकिन वो नहीं पहुंची थी। टाइम पर पीआरवी वाहन में न आने पर उर्मिला के मोबाइल पर फोन किया लेकिन वो मिल नहीं रहा था। रात 11 बजे उर्मिला के आत्महत्या करने की खबर मिली तो सभी परेशान हो गए।

मेसेज कर दी जान
आरोपी होमगार्ड जितेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि रविवार रात नौ बजे के करीब उसके वाट्सएप मैसेंजर पर मेसेज करते हुए उर्मिला ने लिखा था कि तुमने इसके पहले तो मुझे आत्महत्या करने से रोक लिया था। अब चाहकर भी नहीं रोक पाओगे। मैं जान देने जा रही हूं। जीतेन्द्र ने बताया कि मेसेज देखते ही वो लखनऊ से अपनी ड्यूटी छोड़कर तुरंत उर्मिला को बचाने के लिए बाइक से मोहनलालगंज पहुंचा लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आरोपी होमगार्ड जीतेन्द्र ने बताया कि वह और उर्मिला अच्छे दोस्त थे। निगोहां में तैनाती के दौरान उसकी दोस्ती हुई थी। इसके बाद से वो जरूरत पर उर्मिला की मदद कर देता था। एक माह पहले उर्मिला ने जो स्कूटी खरीदी थी वो भी उसके ही नाम थी। जितेन्द्र ने बताया कि हर माह उसे जो वेतन मिलता था वो अपनी बीमार मां के इलाज समेत परिवार के भरण पोषण में लगाती थी। उसके बाद भी परिवारीजन संतुष्ट नहीं थे। इसके चलते वो डिप्रेशन में थी और तीन माह पहले ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने जा रही थी। पता चलने पर उसे आत्महत्या करने से रोकने के साथ समझाया था।

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