7 महीने हो गए, लेकिन किसानों के 7 शब्द नहीं सुन रही सरकार: भगवंत मान

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नई दिल्ली. कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है. मंगलवार को भगवंत मान ने किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि लगता है आत्मनिर्भर भारत की बात करने वाली केंद्र सरकार के मंत्री किसानों के क़ानूनों को रद करवाने में खुद आत्मनिर्भर नहीं है.. शायद इसलिए हर मीटिंग के बीच में ब्रेक लेकर अपने आकाओं से बात करते हैं. उन्होंने कहा कि 7 महीने हो गए खेती बिल को कैबिनेट में पास हुए. 7 महीने में किसानों की सात शब्दों की बात सरकार नहीं सुन रही है. किसानों की मांग को दोहराते हुए उन्होंने सात शब्दों में लिखा कि किसान विरोधी तीनों काले कानून वापस लो.

आंदोलन अब धीरे-धीरे हो रहा तेज
नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर यूपी बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों का आंदोलन अब धीरे-धीरे तेज होता जा रहा है। सोमवार को चिल्ला बॉर्डर पर धरनारत किसान तंबू उखाड़ कर दोबारा मजबूती से बांधते दिखाई दिए।किसानों की इस तरह की गतिविधि से साफ है कि अपनी मांगों के माने जाने तक वह पीछे हटने मूड में नहीं हैं। मोहाली से भी किसानों की एक टीम आई है, जोकि तंबुओं को उखाड़कर दोबारा मजबूती से बांध रही है। बता दें कि नए कृषि कानून को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर किसान लगभग एक महीने से प्रर्दशन कर रहे हैं। 26 नवंबर को पंजाब और हरियाणा से हजारों की संख्या में सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर पहुंचे थे। तब से अभी तक किसान यहां डटे हुए हैं।

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